Badrinath Temple Donation Scam: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ मंदिर में दानपात्र से कथित चोरी के मामले में गिरफ्तार मंदिर समिति के सरकारी पीए एवं प्रोटोकॉल अधिकारी प्रमोद नौटियाल को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने आरोपी की कस्टडी मांगी थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद उसे जिला कारागार भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, 12 जुलाई की रात आरोपी को उसके आवास से गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से दान की गिनती के दौरान नकदी और अन्य कीमती वस्तुओं की हेराफेरी करता था। मोबाइल के नीचे नोटों की गड्डी जांच में सामने आया कि प्रमोद नौटियाल दान गिनती कक्ष में नोटों की गड्डी को अपने मोबाइल फोन के नीचे छिपाकर बाहर ले जाता था। इसके बाद वह नकदी को सुरक्षित स्थान पर रखकर दोबारा गिनती कक्ष में लौट आता था। सीसीटीवी फुटेज में 2 जुलाई को ऐसी गतिविधियां कई बार दिखाई देने का दावा किया गया है। शक से बचने के लिए वह कई बार स्वयं भी नोटों की गड्डियां बनाने का काम करता नजर आया। पुलिस का कहना है कि एक फुटेज में आरोपी एक लिफाफे में रखे सोने-चांदी के सिक्के और शालिग्राम शिला को अपने कोट की जेब में रखते हुए भी दिखाई देता है। इसके बाद वह मोबाइल के नीचे नोटों की गड्डी छिपाकर कमरे से बाहर निकलता है। पहले की फुटेज में भी दिखी संदिग्ध हरकत जांच केवल 2 जुलाई तक सीमित नहीं रही। पुलिस को 29 जून की रिकॉर्डिंग में भी आरोपी इसी तरह नोटों की गड्डी बाहर ले जाता हुआ दिखाई देने का दावा है। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह कथित हेराफेरी लंबे समय से चल रही हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। लैपटॉप जब्त, डेटा की जांच जारी पुलिस ने आरोपी के कमरे से एक सरकारी लैपटॉप भी बरामद किया है। अब उसके डेटा की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे मामले से जुड़े कुछ और महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। नार्को टेस्ट की उठी मांग इस बीच कांग्रेस नेता कमल रतूड़ी ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोपी का नार्को टेस्ट कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि इस पूरे प्रकरण में अन्य लोग भी शामिल हैं तो जांच के जरिए उनकी भूमिका भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक मंदिर समिति के वर्तमान बोर्ड को भंग करने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि जांच प्रभावित न हो। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ये भी पढ़ें: 120 की रफ्तार, बिना टोल प्लाजा कटेगा टैक्स! आखिर कैसे बना देश का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे?